डीमैट शेयर और म्यूचुअल फंड ट्रांसमिशन — मृत्यु के बाद प्रक्रिया
शेयर और म्यूचुअल फंड मृत्यु के बाद स्वतः ट्रांसफर नहीं होते
बैंक FD की तरह डीमैट शेयर और म्यूचुअल फंड स्वतः उत्तराधिकारियों को हस्तांतरित नहीं होते। इसके लिए एक अलग प्रक्रिया है जिसे "Transmission" कहा जाता है — और यह प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि मृतक ने नामांकन (Nomination) किया था या नहीं, और होल्डिंग का मूल्य कितना है। SEBI ने इन प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं, लेकिन व्यावहारिक रूप से डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (Zerodha, Groww, ICICI Direct) और म्यूचुअल फंड कंपनियों की अपनी अतिरिक्त आवश्यकताएं होती हैं।
डीमैट शेयर — नॉमिनी होने पर (सबसे सरल मार्ग)
यदि मृतक ने डीमैट खाते में नॉमिनी दर्ज किया था, तो ट्रांसमिशन अपेक्षाकृत त्वरित है — आमतौर पर 7 दिनों में पूरा हो जाता है। नॉमिनी को डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (DP) को ये दस्तावेज़ जमा करने होते हैं:
- Transmission Request Form (TRF) — DP से प्राप्त करें
- मृत्यु प्रमाणपत्र की मूल या नोटरीकृत प्रति
- नॉमिनी का स्व-सत्यापित PAN कार्ड और KYC विवरण
- नॉमिनी के बैंक खाते का केंसिल चेक या 3 महीने का बैंक स्टेटमेंट
किसी प्रोबेट, उत्तराधिकार प्रमाणपत्र या अन्य वारिसों की NOC की आवश्यकता नहीं है। लेकिन एक महत्वपूर्ण कानूनी बात याद रखें — नॉमिनी केवल एक ट्रस्टी (Custodian) है। सर्वोच्च न्यायालय ने कई निर्णयों में स्पष्ट किया है कि नॉमिनी को शेयर प्राप्त होते हैं, लेकिन वह उन्हें कानूनी उत्तराधिकारियों को उनके हिस्से के अनुसार वितरित करने के लिए बाध्य है।
डीमैट शेयर — बिना नॉमिनी (मूल्य-आधारित प्रक्रिया)
यदि नामांकन नहीं है, तो SEBI ने मूल्य-आधारित सीमाएं निर्धारित की हैं:
₹15 लाख तक की होल्डिंग: उत्तराधिकारी बिना अदालती आदेश के ट्रांसमिशन करा सकते हैं। इसके लिए मृत्यु प्रमाणपत्र, क्षतिपूर्ति बांड (Indemnity Bond — ₹500 के गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर), प्रत्येक दावेदार का शपथ पत्र (₹100 के स्टांप पेपर पर), और अन्य उत्तराधिकारियों से NOC जमा करना होगा।
₹15 लाख से अधिक की होल्डिंग: दीवानी अदालत से प्राप्त उत्तराधिकार प्रमाणपत्र, प्रोबेट, या लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन प्रस्तुत करना अनिवार्य है — गैर-विवादित मामले में अक्सर 45 से 90 दिन लग सकते हैं; विवादित मामलों में अधिक समय लग सकता है।
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म्यूचुअल फंड ट्रांसमिशन — अलग सीमाएं
म्यूचुअल फंड के लिए AMC (Asset Management Companies) की सीमाएं डीमैट से भिन्न हैं:
₹5 लाख तक: बैंक मैनेजर द्वारा सत्यापित हस्ताक्षर प्रमाण पत्र, दावेदार का KYC, संबंध प्रमाण पत्र, शपथ पत्र और क्षतिपूर्ति बांड पर्याप्त हैं।
₹5 लाख से ₹10 लाख तक: नोटरीकृत पंजीकृत वसीयत और दावेदार द्वारा निष्पादित नोटरीकृत क्षतिपूर्ति बांड।
₹10 लाख से अधिक: उत्तराधिकार प्रमाणपत्र, प्रोबेटेड वसीयत, या लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
विशेष नियम — ₹5 लाख से अधिक के दावों में दावेदार के हस्ताक्षरों को नोटरी पब्लिक या JMFC द्वारा सत्यापित किया जाना ज़रूरी है।
Letter of Confirmation (LoC) और 120-दिन की सीमा
भौतिक (फिजिकल) शेयर सर्टिफिकेट के ट्रांसमिशन में एक अतिरिक्त चरण है — RTA (Registrar and Transfer Agent) पहले एक Letter of Confirmation (LoC) जारी करता है, जिसके बाद इन शेयरों को 120 दिनों के भीतर डीमैट में परिवर्तित करना अनिवार्य है। यदि यह सीमा चूक जाती है, तो LoC निरस्त हो जाता है और RTA से नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती है।
अभी क्या करें?
सबसे महत्वपूर्ण कदम — अपने सभी डीमैट खातों और म्यूचुअल फंड फोलियो में नामांकन सुनिश्चित करें। Zerodha, Groww जैसे प्लेटफॉर्म पर यह ऑनलाइन 5 मिनट में हो जाता है। बिना नामांकन के, एक ₹20 लाख के पोर्टफोलियो का ट्रांसमिशन गैर-विवादित मामले में 45 से 90 दिन और ₹15,000 से ₹75,000 के अदालती खर्चों में बदल सकता है।
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