उत्तराधिकार प्रमाण पत्र: कोर्ट शुल्क, फॉर्मेट और ऑनलाइन आवेदन की पूरी जानकारी
बैंक खाते में पैसे फंसे हैं, म्यूचुअल फंड के यूनिट हैं, डीमैट खाते में शेयर हैं — लेकिन मृत व्यक्ति का कोई नॉमिनी नहीं था। अब क्या करें? यह स्थिति लाखों भारतीय परिवारों के सामने आती है। जवाब स्थिति पर निर्भर है: बैंक की सरल दावा-प्रक्रिया उपलब्ध न हो तो उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) रास्ता हो सकता है।
उत्तराधिकार प्रमाण पत्र क्या है?
यह भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के भाग X (धाराएं 370-390) के तहत जिला न्यायाधीश या सक्षम सिविल कोर्ट द्वारा जारी एक न्यायिक आदेश है। यह प्रमाण पत्र मृत व्यक्ति के कर्ज और प्रतिभूतियों (Debts and Securities) को प्राप्त करने के लिए आवेदक की प्राधिकृति स्थापित करता है।
कब जरूरी होता है:
- जब मृत व्यक्ति बिना वसीयत के चला गया हो (Intestate Death)
- बैंक बचत/FD खाते में नॉमिनी न हो और राशि सामान्य बैंकों में ₹15 लाख से अधिक (सहकारी बैंकों में ₹5 लाख से अधिक) हो
- डीमैट शेयरों का हस्तांतरण करना हो (₹30 लाख से अधिक के लिए)
- म्यूचुअल फंड यूनिट का दावा करना हो और नामांकन/सरल transmission route पर्याप्त न हो
उत्तराधिकार प्रमाण पत्र का फॉर्मेट
एक मानक उत्तराधिकार प्रमाण पत्र याचिका में ये बातें शामिल होती हैं:
- याचिकाकर्ता का विवरण — नाम, पता, मृत व्यक्ति से संबंध
- मृत व्यक्ति का विवरण — नाम, पता, मृत्यु की तिथि और स्थान
- कानूनी वारिसों की सूची — सभी जीवित वारिसों के नाम
- संपत्तियों का विवरण — बैंक खाते, FDR, शेयर आदि की विस्तृत सूची
- यह घोषणा कि याचिकाकर्ता उन संपत्तियों का एकमात्र या अधिकृत दावेदार है
कोर्ट शुल्क
उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए संपत्ति के मूल्य पर आधारित कोर्ट फीस लगती है। यह राज्यवार अलग होती है:
| राज्य | कोर्ट फीस का आधार |
|---|---|
| दिल्ली | चल संपत्ति के मूल्य का लगभग 2–3% — राज्य के लागू नियम देखें |
| महाराष्ट्र | चल संपत्ति के मूल्य का लगभग 2–3% — राज्य के लागू नियम देखें |
| कर्नाटक | चल संपत्ति के मूल्य का लगभग 2–3% — राज्य के लागू नियम देखें |
| उत्तर प्रदेश | चल संपत्ति के मूल्य का लगभग 2–3% — राज्य के लागू नियम देखें |
इसके अलावा वकील की फीस, नोटरी शुल्क और नोटिस/प्रकाशन का खर्च, जहाँ लागू हो, आता है।
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आवेदन प्रक्रिया (चरण-दर-चरण)
चरण 1: जिला न्यायालय में याचिका दाखिल करें
मृत व्यक्ति के निवास स्थान या संपत्ति के क्षेत्राधिकार वाले जिला न्यायाधीश या सक्षम सिविल कोर्ट के यहां याचिका दाखिल करें।
चरण 2: दस्तावेज संलग्न करें
- मृत्यु प्रमाण पत्र (मूल और जहाँ मांगी जाए वहाँ प्रमाणित/नोटरीकृत प्रतियां)
- कानूनी वारिस प्रमाण पत्र
- सभी बैंक/निवेश खातों का विवरण
- आवेदक का पहचान पत्र और पता प्रमाण
- परिवार के सदस्यों के आधार कार्ड, जहाँ अदालत/कार्यालय मांगे
चरण 3: कोर्ट फीस जमा करें
न्यायालय शुल्क अधिनियम के तहत संबंधित कोर्ट की स्टाम्प काउंटर पर।
चरण 4: 45 दिनों की आपत्ति अवधि
न्यायालय 45 दिन की नोटिस/आपत्ति अवधि देता है; जहाँ लागू हो, सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित किया जाता है। इस दौरान कोई भी व्यक्ति आपत्ति दर्ज कर सकता है। यही सबसे लंबा चरण है।
चरण 5: सुनवाई और आदेश
यदि कोई आपत्ति न हो, तो न्यायालय उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करता है।
कुल समयसीमा: सामान्यतः 3 से 6 महीने (विवाद न हो तो)।
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
अभी तक उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया नहीं है। आपको न्यायालय में भौतिक रूप से उपस्थित होना होगा।
हालांकि कुछ राज्यों (जैसे महाराष्ट्र) में ई-कोर्ट पोर्टल पर याचिका की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है। कुछ वकील ऑनलाइन कंसल्टेशन देकर प्रक्रिया शुरू करने में मदद करते हैं।
उत्तराधिकार प्रमाण पत्र बनाम कानूनी वारिस प्रमाण पत्र
यह सबसे अधिक पूछा जाने वाला सवाल है। दोनों में बड़ा अंतर है:
| पहलू | उत्तराधिकार प्रमाण पत्र | कानूनी वारिस प्रमाण पत्र |
|---|---|---|
| जारी करने वाला | जिला न्यायालय | तहसीलदार/राजस्व विभाग |
| समय | 3-6 महीने | 15-30 दिन |
| शुल्क | संपत्ति मूल्य पर आधारित | नाममात्र (₹100-500) |
| उपयोग | बैंक, शेयर, वित्तीय दावे (सरल बैंक दावा-प्रक्रिया के अपवाद के साथ) | संपत्ति म्यूटेशन, पेंशन, सरकारी लाभ |
| कानूनी शक्ति | अधिक शक्तिशाली | सीमित |
सरल नियम: चल संपत्ति (बैंक, शेयर) के लिए सामान्यतः उत्तराधिकार प्रमाण पत्र या संस्था की लागू transmission/सरल दावा-प्रक्रिया देखें। अचल संपत्ति के म्यूटेशन के लिए कानूनी वारिस प्रमाण पत्र उपयोगी होता है।
₹15 लाख तक की बैंक राशि के लिए विकल्प
RBI के नवंबर 2025 के संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि बैंक बचत खाते में ₹15 लाख तक की राशि है और कोई नॉमिनी नहीं है, तो उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के बिना भी दावा किया जा सकता है। इसके लिए:
- दावा प्रपत्र (Annex I-B)
- कानूनी वारिस प्रमाण पत्र
- अन्य वारिसों का अनापत्ति पत्र (Disclaimer — Annex I-D)
- क्षतिपूर्ति बांड (Annex I-C)
यह नियम बैंकों पर लागू होता है — सहकारी बैंकों के लिए यह सीमा ₹5 लाख है।
विरासत की प्रक्रिया में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र दोनों की जरूरत कब और कैसे पड़ती है — यह और दर्जनों अन्य सवालों के जवाब हमारी विरासत और उत्तराधिकार गाइड में मिलेंगे।
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