Gratuity Form F नामांकन और मृत्यु के बाद उपदान दावा प्रक्रिया
Form F क्या है और हर कर्मचारी को यह क्यों भरना चाहिए?
उपदान भुगतान अधिनियम (Payment of Gratuity Act), 1972 के तहत Form F एक नामांकन प्रपत्र है जिसके माध्यम से कर्मचारी यह तय करता है कि उसकी मृत्यु होने पर ग्रेच्युटी की राशि किसे मिलेगी। बिना नामांकन के ग्रेच्युटी भुगतान में महीनों की देरी हो सकती है — परिवार को कानूनी वारिस प्रमाणपत्र लाना पड़ता है, नियोक्ता सत्यापन करता है, और कभी-कभी मामला श्रम न्यायालय तक पहुंच जाता है।
अधिनियम की धारा 6 के तहत हर कर्मचारी को नियुक्ति के पहले वर्ष की समाप्ति के 30 दिनों के भीतर Form F में नामांकन करना अनिवार्य है। यदि कर्मचारी के परिवार सदस्य हैं (पत्नी/पति, बच्चे, माता-पिता), तो नामांकन केवल परिवार के सदस्यों के पक्ष में ही हो सकता है — किसी बाहरी व्यक्ति का नामांकन तभी मान्य है जब कर्मचारी का कोई परिवार न हो।
मृत्यु के बाद ग्रेच्युटी दावा — 5 वर्ष सेवा नियम की छूट
आम धारणा है कि ग्रेच्युटी केवल 5 वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करने पर मिलती है। यह सामान्य परिस्थितियों (इस्तीफा, सेवानिवृत्ति) में सही है, लेकिन मृत्यु के मामले में इस नियम में पूर्ण छूट है। अधिनियम की धारा 4(1) स्पष्ट करती है — यदि कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होती है, तो ग्रेच्युटी का भुगतान तब भी अनिवार्य है जब उसने 5 वर्ष की सेवा पूरी न की हो।
इसका अर्थ है कि यदि किसी कर्मचारी ने केवल 2 या 3 वर्ष काम किया है और सेवा के दौरान उसकी मृत्यु हो जाती है, तो उसके नामांकित व्यक्ति को ग्रेच्युटी का पूरा हकदार है।
ग्रेच्युटी की गणना कैसे होती है?
गणना सूत्र: अंतिम माह का मूल वेतन (Basic + DA) × 15/26 × सेवा के वर्ष
- 15/26 का अर्थ है कि प्रत्येक वर्ष की सेवा के लिए 15 दिनों के वेतन के बराबर राशि मिलती है (एक माह में 26 कार्य दिवस मानकर)
- 6 महीने से अधिक की सेवा अवधि को पूर्ण वर्ष माना जाता है
- अधिकतम सीमा: ₹20,00,000 (29 मार्च 2018 की अधिसूचना के अनुसार)
उदाहरण: यदि कर्मचारी का अंतिम मूल वेतन + DA = ₹35,000 और सेवा अवधि = 8 वर्ष 7 माह (9 वर्ष माना जाएगा), तो ग्रेच्युटी = ₹35,000 × 15/26 × 9 = ₹1,81,731।
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दावा प्रक्रिया — चरण दर चरण
1. नियोक्ता को सूचित करें: मृत्यु के तुरंत बाद नियोक्ता के HR विभाग को मृत्यु प्रमाणपत्र और Form F की प्रति दें। नियोक्ता को प्रतिष्ठान खुलने की सूचना Form A (Notice of Opening) में Controlling Authority को जमा करनी होती है — यदि यह पहले नहीं हुआ है, तो कर्मचारी के अधिकार पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
2. Form J में आवेदन करें: नामांकित व्यक्ति को ग्रेच्युटी के लिए Form J (Application for Gratuity by a Nominee) भरना होगा। इसमें मृतक का विवरण, सेवा अवधि, अंतिम वेतन और मृत्यु प्रमाणपत्र संलग्न करें।
3. भुगतान की समय-सीमा: अधिनियम की धारा 7(3) के तहत नियोक्ता को ग्रेच्युटी payable होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर भुगतान की व्यवस्था करनी होती है। नियमों के तहत आवेदन मिलने के 15 दिनों में Form L में भुगतान की सूचना दी जाती है। समय पर भुगतान न होने पर धारा 7(3A) के अनुसार ब्याज देय हो सकता है।
4. शिकायत — नियंत्रक प्राधिकरण: यदि नियोक्ता भुगतान से इनकार करता है या अनुचित विलंब करता है, तो नामांकित व्यक्ति Form N में शिकायत "Controlling Authority" (आमतौर पर जिला श्रम आयुक्त या सहायक श्रम आयुक्त) के पास दायर कर सकता है।
ग्रेच्युटी पर कर नियम
मृत्यु के कारण प्राप्त ग्रेच्युटी पर कर-छूट कर्मचारी की श्रेणी और लागू धारा पर निर्भर करती है। Payment of Gratuity Act के अंतर्गत आने वाले गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए धारा 10(10)(ii) के तहत छूट वास्तविक राशि, वैधानिक गणना और ₹20 लाख की सीमा में जो कम हो, उतनी होती है; इसे धारा 10(10)(i) के तहत हर मामले में पूर्णतः कर-मुक्त नहीं माना जा सकता।
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