$0 India — End-of-Life Planning Checklist

होम लोन मृत्यु के बाद — बीमा, सह-उधारकर्ता और EMI का क्या होता है?

पहला सवाल — क्या होम लोन की EMI बंद हो जाती है?

नहीं। मृत्यु से होम लोन स्वतः समाप्त नहीं होता। बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के लिए यह एक ऋण अनुबंध है, और वह अपनी बकाया राशि की वसूली का अधिकार रखती है। लेकिन वसूली कैसे होगी — यह इस पर निर्भर करता है कि लोन के साथ बीमा था या नहीं, सह-उधारकर्ता (co-borrower) कोई है या नहीं, और संपत्ति पर गिरवी (mortgage) किसकी है।

परिदृश्य 1 — होम लोन बीमा होने पर

यदि ऋण के साथ Home Loan Protection Insurance (HLPI) या कोई अन्य ऋण-सुरक्षा बीमा लिया गया हो, तो उसकी पॉलिसी की शर्तें देखें। यह term life insurance जैसा हो सकता है। यदि मृतक ने यह बीमा लिया था और पॉलिसी सक्रिय (active) है:

बीमा पॉलिसी की शर्तों के अनुसार बीमा कंपनी बकाया लोन का पूरा या कुछ हिस्सा बैंक को दे सकती है। शेष देयता या कोई बची हुई राशि पॉलिसी और ऋण दस्तावेज़ों के अनुसार तय होगी। बीमा क्लेम के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र, लोन खाता विवरण और पॉलिसी नंबर बैंक को दें — बैंक स्वयं बीमा कंपनी से संपर्क करता है।

ध्यान रखें — कुछ HLPI पॉलिसी में "decreasing cover" होता है, जिसमें बीमा राशि लोन बैलेंस के साथ घटती जाती है। यह सुनिश्चित करें कि पॉलिसी अभी भी बकाया राशि को पूरी तरह कवर करती है।

परिदृश्य 2 — सह-उधारकर्ता (Co-Borrower) होने पर

यदि लोन संयुक्त (joint) है — जैसे पति-पत्नी ने मिलकर लिया — तो जीवित सह-उधारकर्ता पर बकाया EMI चुकाने का पूर्ण कानूनी दायित्व है। बैंक सह-उधारकर्ता से सीधे वसूली करेगा। यदि सह-उधारकर्ता EMI चुकाने में असमर्थ है, तो बैंक से बात करके लोन पुनर्गठन (restructuring — EMI कम करना या अवधि बढ़ाना) का अनुरोध करें।

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परिदृश्य 3 — न बीमा, न सह-उधारकर्ता

यह सबसे कठिन स्थिति है। बैंक मृतक के कानूनी उत्तराधिकारियों से संपर्क करेगा। उत्तराधिकारियों के पास तीन विकल्प हैं:

विकल्प A — EMI चुकाते रहें: यदि उत्तराधिकारी संपत्ति रखना चाहते हैं, तो लोन अपने नाम पर ट्रांसफर करवाएं (Loan Assumption) और EMI जारी रखें। इसके लिए बैंक उत्तराधिकारी की आय और क्रेडिट योग्यता का मूल्यांकन करेगा।

विकल्प B — संपत्ति बेचकर लोन चुकाएं: यदि EMI चुकाना संभव नहीं है, तो संपत्ति बाजार मूल्य पर बेचकर बकाया लोन चुकाएं। बिक्री राशि से लोन चुकाने के बाद शेष राशि उत्तराधिकारियों की होगी।

विकल्प C — संपत्ति का निपटान करें: यदि संपत्ति का बाजार मूल्य बकाया लोन से कम है (negative equity), तो उत्तराधिकारी बैंक से संपत्ति और ऋण के निपटान की प्रक्रिया पर बात कर सकते हैं। बैंक SARFAESI Act, 2002 के तहत संपत्ति की नीलामी कर सकता है। महत्वपूर्ण बात — भारतीय कानून में उत्तराधिकारी की व्यक्तिगत देनदारी केवल विरासत में मिली संपत्ति के मूल्य तक सीमित है; बैंक उत्तराधिकारी की निजी संपत्ति से लोन वसूलने का हकदार नहीं है।

बैंक से तुरंत संपर्क करें — EMI चूकने से बचें

मृत्यु के तुरंत बाद बैंक को सूचित करें। यदि किसी term loan की किस्त या ब्याज 90 दिनों से अधिक overdue रहता है, तो खाता NPA (Non-Performing Asset) बन सकता है। मृत्यु की सूचना देने पर बैंक से लिखित रूप से राहत या पुनर्गठन का अनुरोध करें; ऐसी छूट स्वचालित नहीं होती और बैंक/ऋण दस्तावेज़ पर निर्भर करती है।

होम लोन, कर्ज़, बीमा और संपत्ति हस्तांतरण — मृत्यु के बाद वित्तीय दायित्वों की पूरी प्रक्रिया India End-of-Life Planning Guide में उपलब्ध है।

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