Release Deed Stamp Duty India: विरासत में मिली संपत्ति पर हिस्सा छोड़ने की प्रक्रिया
पिता की मृत्यु के बाद चार भाई-बहनों में मकान है — लेकिन एक भाई ने तय किया कि वह अपना हिस्सा बड़े भाई को दे देगा। इस काम के लिए एक कानूनी दस्तावेज़ बनवाना होगा: Release Deed या Relinquishment Deed। बिना इस दस्तावेज़ के संपत्ति का म्यूटेशन नहीं होगा, और बाद में विवाद की संभावना बनी रहेगी।
भारत में हर साल लाखों परिवारों को यह समस्या आती है — समझ नहीं आता कि क्या बनवाएं, कहाँ जाएं और कितना खर्च होगा।
Release Deed और Relinquishment Deed में क्या फर्क है
व्यावहारिक दृष्टि से ये दोनों एक ही काम करते हैं — एक सह-मालिक अपना अधिकार दूसरे के पक्ष में छोड़ता है। कानूनी भाषा में थोड़ा फर्क है:
Relinquishment Deed (त्याग विलेख): यह तब बनता है जब कोई व्यक्ति अपना विरासत में मिला हिस्सा सह-वारिसों के पक्ष में छोड़ता है। यह केवल संयुक्त मालिकों के बीच हो सकता है।
Release Deed (मुक्ति विलेख): इसका दायरा थोड़ा व्यापक है — इसमें कोई भी दावेदार (जो जरूरी नहीं कि सह-मालिक हो) किसी संपत्ति पर अपना दावा छोड़ता है। विरासत में मिली संपत्ति के लिए आमतौर पर Relinquishment Deed ही बनता है।
आम बोलचाल में दोनों को "Release Deed" कहा जाता है और सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में दोनों का रजिस्ट्रेशन एक ही तरह होता है।
कब ज़रूरी होता है यह दस्तावेज़
मृत्यु के बाद Release Deed तब बनवानी पड़ती है जब:
- एक से अधिक वारिस हैं और कोई एक अपना हिस्सा दूसरे को देना चाहता है
- सभी वारिस मिलकर संपत्ति किसी एक के नाम करना चाहते हैं
- नगर निगम में म्यूटेशन के लिए साफ टाइटल चाहिए
- भविष्य में बिक्री के समय खरीदार के लिए निर्विवाद स्वामित्व साबित करना हो
महत्वपूर्ण: Release Deed केवल सह-मालिकों के बीच ही हो सकती है। अगर आप किसी बाहरी व्यक्ति को हिस्सा दे रहे हैं जो वारिस नहीं है, तो वह "Gift Deed" बन जाएगी — और उस पर आयकर अधिनियम के तहत गिफ्ट टैक्स लग सकता है।
स्टाम्प ड्यूटी: राज्यवार दरें
यही वह बिंदु है जहाँ अधिकतर लोग भ्रमित होते हैं।
महाराष्ट्र (सबसे कम — रक्त संबंधियों के बीच पैतृक संपत्ति के लिए):
महाराष्ट्र स्टाम्प अधिनियम के अनुच्छेद 52 के तहत, रक्त संबंधियों के बीच पैतृक संपत्ति की Release Deed पर स्टाम्प ड्यूटी केवल ₹200 और रजिस्ट्रेशन फीस अधिकतम ₹30,000 है।
लेकिन यह छूट तब नहीं मिलेगी जब:
- संपत्ति self-acquired हो (खुद खरीदी गई हो)
- Release Deed HUF के पक्ष में हो (Hindu Undivided Family)
- प्राप्तकर्ता सीधा वारिस न हो
ऐसी स्थिति में यह "Conveyance" माना जाएगा और बाजार मूल्य का 5-6% स्टाम्प ड्यूटी देनी होगी।
अन्य प्रमुख राज्यों की स्थिति:
| राज्य | रक्त संबंधियों के बीच दर | अन्य के लिए दर |
|---|---|---|
| महाराष्ट्र | ₹200 (पैतृक) | 5-6% बाजार मूल्य |
| दिल्ली | बाजार मूल्य का 2-4% (महिला वारिस: 2%, पुरुष: 4%) | 6% |
| राजस्थान | ₹1,000 (रक्त संबंधी) | 6% |
| उत्तर प्रदेश | संपत्ति मूल्य का 1% (न्यूनतम ₹1,000) | 7% |
| कर्नाटक | बाजार मूल्य का 1% (अधिकतम ₹20,000) | 5% |
| तमिलनाडु | बाजार मूल्य का 1% (अधिकतम ₹4,000) | 7% |
अपने राज्य की वर्तमान दरें जमा करने से पहले स्थानीय सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से ज़रूर पुष्टि करें क्योंकि ये दरें बदलती रहती हैं।
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Release Deed के लिए कानूनी ज़रूरतें
Registration Act, 1908 की धारा 17 के तहत, Release Deed का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। बिना रजिस्ट्रेशन के यह दस्तावेज़ कोर्ट में मान्य नहीं होगा।
रजिस्ट्रेशन के लिए ज़रूरी:
- दस्तावेज़ लिखित में हो
- सभी पक्षकार हस्ताक्षर करें
- कम से कम दो गवाह हों
- सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रस्तुत किया जाए
मृत्यु के बाद संपत्ति के पूरे बँटवारे और म्यूटेशन की प्रक्रिया को समझने के लिए हमारी अंत्येष्टि और श्राद्ध गाइड देखें — जिसमें Release Deed का मसौदा कैसे तैयार करें और सब-रजिस्ट्रार में जमा करने की पूरी प्रक्रिया दी गई है।
Release Deed बनवाने की प्रक्रिया
चरण 1: दस्तावेज़ तैयार करें
- मृत्यु प्रमाण पत्र
- Legal Heir Certificate / Surviving Member Certificate
- संपत्ति के दस्तावेज़ (सेल डीड, रजिस्ट्री, खसरा-खतौनी)
- सभी पक्षकारों के आधार कार्ड और पैन कार्ड
चरण 2: मसौदा तैयार करें किसी वकील या दस्तावेज़ लेखक (Document Writer) से Release Deed का मसौदा तैयार करवाएं। इसमें स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए:
- संपत्ति का पूरा विवरण (खसरा नंबर, रकबा, स्थान)
- जो हिस्सा छोड़ा जा रहा है उसका विवरण
- प्राप्तकर्ता का नाम और रिश्ता
- यह कि यह छोड़ना स्वेच्छा से और बिना दबाव के है
चरण 3: स्टाम्प पेपर खरीदें लागू स्टाम्प ड्यूटी के अनुसार स्टाम्प पेपर खरीदें। अधिकतर राज्यों में e-Stamp भी उपलब्ध है।
चरण 4: सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्रेशन सभी पक्षकार (जो हिस्सा छोड़ रहे हैं और जिसे मिल रहा है) दो गवाहों के साथ सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में उपस्थित हों। रजिस्ट्रार दस्तावेज़ की जाँच करेगा, पहचान सत्यापित करेगा और रजिस्ट्रेशन करेगा।
Family Settlement और Release Deed में क्या चुनें
जब सभी वारिस मिलकर संपत्ति आपस में बाँटना चाहते हों, तो Family Settlement Agreement एक विकल्प है। लेकिन अगर इसे रजिस्टर न करवाया जाए तो यह कमज़ोर दस्तावेज़ होता है। कोर्ट में अक्सर देखा गया है कि बिना रजिस्टर्ड Family Settlement को चुनौती दी जा सकती है।
Release Deed रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है इसलिए यह कानूनी रूप से मज़बूत है। अगर केवल एक-दो वारिस हिस्सा छोड़ रहे हों, तो Release Deed सबसे सीधा रास्ता है।
नोट: अगर छोड़ने वाला खुद नहीं आ सकता
अगर कोई वारिस विदेश में है या शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हो सकता, तो वह किसी विश्वसनीय व्यक्ति को Power of Attorney (POA) दे सकता है। POA धारक उसकी तरफ से सब-रजिस्ट्रार में उपस्थित होकर Release Deed रजिस्टर करवा सकता है। विदेश से POA देने के लिए उस देश के भारतीय दूतावास में नोटरी करवानी होगी।
Release Deed के बाद म्यूटेशन, बैंक खाते का ट्रांसफर और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए पूरी गाइड यहाँ से डाउनलोड करें — जिसमें प्रत्येक चरण के लिए दस्तावेज़ सूची और Timeline दी गई है।
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